Lyrics of Sur Dhaaraa

सुर धारा

संवर जाए सबका जीवन

संवर जाए सबका जीवन, लेके गुरु नाम

बन जाए बिगड़े हुए, सबके ही काम

तेरे ही दम से रोशन सारी दुनिया

तुमने ही जग को सारे पावन किया

जिसने तेरा नाम लिया, उसको तूने थाम लिया

थाम करके बाँह तेरा हो गए चारों धाम

संवर जाए सबका जीवन....

स्वामी विद्यानंद की भक्ति हमें मिल गई

जीवन मरू में ज्ञान कली खिल गई

तेरी खुशबू से भगवन भर दे मेरा भी जीवन

तेरी दया से महके मेरे सुबहो शाम

संवर जाए सबका जीवन....

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गुरु चरण करके

गुरु चरण करके स्मरण

बिताऊँ जीवन

आनंद ही आनंद में

रहो तुम मगन

सब कुछ उन चरणों में

कर दो अर्पण

हर दिशा में गुरुदेवा

हर रूप में गुरुदेवा

हर नयन में गुरुदेवा

जैसे ये दर्पण

पाओगे तुम पास अपने

बुलाओ जो तन मन से

तन मन कर दो अर्पण

वो तो सदा ही है सदा ही है

सुख का कारण

सदा अत्य महा शक्ति

मुक्ति दाता गुरुदेवा

प्रेम पुरुष बन के गुरु

सजाया भुवन

कर्म है जो धर्म है वो

धर्म में ही गुरुदेव

करो ध्यान गुरुदेव

सदा मन ही मन मे गुरु नाम

करो सुमिरन

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मैंने तुम्हें अपना

मैंने तुम्हें अपना मान लिया है

क्या है नाता हमारा जान लिया है

तुम हो भगवन साथ मेरे, सब कुछ मेरा हाथ तेरे

मेरे सारे अवगुण दूर कर दो

चित्त में उज्जवल रंग भर दो

मैंने तुम्हें अपना....

तुमने जनम दिया तुम पालो, सुख दुख दोनों तुम सँभालो

मन के अँधेरे सारे मेरे हर लो

जीवन में भक्ति के रंग भर दो

मैंने तुम्हें अपना...

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प्रभु सुंदर तुम

प्रभु सुंदर तुम मंगल करो

अपने चरन धूल से

ज्ञान की ज्योति से जगाओ मेरे

मन में करम प्रेरणा

सफल होगी साधना

मैं हूँ दीन परिचय हीन

कैसे पाऊँ मैं तुमको

कैसे लूँ मैं तेरा परस

कुछ तो दिशा दो हमको

मन का अंधेरा मिटा दो मेरा

देदो नया सवेरा

तेरे प्यार की दिया से प्रभु

तेरे प्यार की दिया से

दर्द से अगर भर जाए मन

ना रहे कोई सहारा

फूल बन के मैं पूजा करूँ

चरणों में तुम्हारे

सदा मेरा मन करूँ अर्पण

तेरे चरण पूजने

भजूँ सदा तेरा नाम प्रभु

भजूँ सदा तेरा नाम

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मन मेरा दे दिया

मन मेरा दे दिया तुम्हें

ले लिया खुद के पास देकर प्राण मेरा

सदा तूही है प्रभु हृदय में मेरे

प्रार्थना किया मैंने बार बार स्वामी तुमसे

माया बंधन में कभी हमें ना बाँधो

हुआ है व्याकुल प्राण तेरे ही लिए

तेरे सन्नाटे में कब बुलाओगे

हृदय तन में स्वजन में निर्जन में

प्रभु तुम ही बैठो आके परम निर्जन में

मन मेरा दे दिया ....

जितना करम ही दो भूलने तुम्हें ना देना

रखना हमेशा मुझे जोड़ के तुझी से

आत्मा जैसे दिन रात बहती लहर में

हर एक कोशिश लेके तेरी ओर जाए

सारा जीवन की पूजा तेरे चरण में

समर्पण किया मैंने आँखों के आँसू में

मन मेरा दे दिया .....

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भजो भाई

भजो भाई गुरु नाम लेलो भाई गुरु नाम

गाओ भाई गुरु नाम सब मिलके

जो पूजे श्री गुरु पदरे

वो ही पाए उसके इष्ट को

नवरूप में नारायण में गुरु ही पूज्य

ईष्ट रूप में हृदय में हम पूजते गुरु को

गुरु बिना कुछ नहीं धरो गुरु वाक्य

सर्वमत से श्रद्धा दे के साथ अपने रहो

पास तुम सदा रहो गुरु दिन में रात में

चाहूँ बस तुझे पाऊँ साँसों की सरगम में

गुरु मूरत ध्यान मूल गुरुपद पूज्य

गुरु वाक्य श्रेष्ठमन्त्र सदा याद रखना

गुरु प्रदर्शित पथ में अनुगत रहो

गुरु कृपालय में अविराम नाम करो

परमतीर्थ गुरु सेवा धरम गुरु निष्ठा

जगत ब्रह्मांड तुष्ट है गुरु सेवा में

एक भगवान है गुरु सब ही का

पथ अलग मत अलग से ही होता है

किसिके मत पथ लेके तर्क नहीं करो

गुरुदेव जो कहे वही वाक्य धरो

सत्य बिना गुरु नहीं गुरु ही सत्य

सत्य का पालन करना अवश्य कर्तव्य

गुरु मन रखना तेरी ओर रहूँ सदा ध्यान में तेरे

रखना तुम सबको चरण में तेरे

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और ना रहो

और ना रहो मन की गुम राहों में

मिल गई जब नई किरण क्यों हो अंधरों में

मिल गई जब भक्ति हृदय में

मिल गई जब तेरी कृपा डर क्या जीवन में

तन मन एक करके अब सोचो मेरे प्यारे

इस जहाँ में गुरु बिना अपना कौन है तेरा

और ना रहो .....

मन में हो तेरे सदगुरु का ध्यान

सफल होगा जीवन तेरा लेकर गुरु का नाम

ब्रह्म सत्य गुरु वचन मान के चलो तुम

भजो गुरु जपो गुरु गुरु शरण रहो

और ना रहो

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गुरु कर उजाला

गुरु कर उजाला जग में सारे

तुम ने किया त्राण

जान ना पाए, देख ना पाए

मेरा मन प्राण

करना स्मरण उनके चरण

लेते रहो नाम

मन ही मन में करो

गुरु का ही ध्यान

जय गुरु जय गुरु जय गुरुनाम ....

करो वरण लेके शरण

करो व्याकुल प्राण

मन में भक्ति भाव जगा के

लेना गुरु नाम

जय गुरु जय गुरु जय गुरुनाम ....

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दुनिया में लोगों की

दुनिया में लोगों की एक ही ज़ात है

हिन्दू हो मुस्लिम हो, सिख या इसाई हो

अलग ज़बान लेकिन एक ही बात है

कोई राम भजता है, कोई कृष्ण पूजता

मस्जिद मज़ारों में कोई उसे ढूँढता

कोई जाए काशी, कोई जाए काबा

वो तो बस अंतस में दरसन की बात है

कोई सुबह ग्रंथ पढ़े, सांझ कोई बाती करे

उसके किए दिन है, वो जो करे रात है

दर्द वो ही देता है, घाव सारे वो भरे

जो भी होता है यहाँ, वो तो गुरुदेव करे

अंतर के नैन खुले, एक ही तू दिखता

दिखता अनेक जब, मन भरमात है

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एक ही सहारा है

एक ही सहारा है गुरु तेरा नाम

नाम जपने से पूरे होंगे चारों धाम

भजो नाम गुरु नाम, जय गुरु नाम

नाम जपने से पाप हो गए दूर

प्रभु संग भगत हुए मशहूर

तेरा नाम दुनिया को

देता हर दुख से आराम

एक ही सहारा है.....

चातक को जैसे बरखा की आस है

भक्तों को तेरे नाम की ही प्यास है

तेरा नाम दुनिया को

देता हर दुख से आराम

एक ही सहारा है.....

कितने नरों को तेरे नाम ने तारा

भव सागर के है पार उतारा

तेरा नाम मिला जिसे

उसे किसी और से क्या काम

देता हर दुख से आराम

एक ही सहारा है.....