Lyrics of Main Chaakar Param Guru Kaa
मैं चाकर परम गुरु का

1
लोगो सुन लो

लोगो सुन लो अब वो कहानी
समझी नहीं जिसे दुनिया दीवानी
आदम या हव्वा, कौन था कहाँ
एक था समय, कुछ ना था यहाँ
शून्य से निकली एक चिंगारी
लगी घूमने धरती ये सारी
वन जंगल नदी सागर बने
इन्सां के बनाए कई ईश्वर बने
कई ईश्वर बने लाखों नाम से
रह पाया ना इन्सां आराम से
उसकी ही मानो जो है परमपिता
उससे कहो बख्शो खता
तुमको भी बाँटा ये जग का भरम
बैरी बना इन्सान का अहम
जब रस्ते बँटे मंज़िल कैसे मिले
मिल के सभी जो ना संग चले
तेरा प्रभु वो ही मेरा प्रभु
इस पंथ से विमुख हो ना कभु
गुरु ईश्वर, ईश्वर ही गुरु
सब सुख पाएँ चरणों में प्रभु

2
दुनिया में लोगों की

दुनिया में लोगों की एक ही ज़ात है
हिन्दू हो मुस्लिम हो, सिख या इसाई हो
अलग ज़बान लेकिन एक ही बात है

कोई राम भजता है, कोई कृष्ण पूजता
मस्जिद मज़ारों में कोई उसे ढूँढता

कोई जाए काशी, कोई जाए काबा
वो तो बस अंतस में दरसन की बात है

कोई सुबह ग्रंथ पढ़े, सांझ कोई बाती करे
उसके किए दिन है, वो जो करे रात है

दर्द वो ही देता है, घाव सारे वो भरे
जो भी होता है यहाँ, वो तो गुरुदेव करे

अंतर के नैन खुले, एक ही तू दिखता
दिखता अनेक जब, मन भरमात है

3
खूब, खूब, खूब, खूब

खूब, खूब, खूब, खूब, खूब, तेरा नाम
झूठ, झूठ, झूठ, झूठ सब अभिमान

लाखों हैं बंदे हँसी ये जहाँ
बिन तेरे नाम, नहीं कुछ भी यहाँ

कुदरत ये प्यारी है ये तेरा करम
स्वर्ग है मेरा तेरे ये चरण

जो निर्बल है, तू उसका सहारा
दिन रैन सबको तूने ही उबारा

मन ये ही चाहे बस तुझमें रमूँ
सुबह-शाम तेरा गुरु नाम जपूँ

एक नाम है जग में साँचा, जिसमें खूब मिठास
ये स्वाद जो जीभ पे लागे, जग लागे उजास
ऐसा जोग करो मेरे प्यारे, ये रसना तेरा नाम उचारे
खूब, खूब, खूब, खूब.......
तेरा कहा हम जो माने हो भवसागर पार
तू ही माझी, तू ही धारा, तुझमें है निस्तार
बंदे कर साहेब बंदगी, वो ही करे उद्धार
खूब, खूब, खूब, खूब....
खूब तेरी प्यारी सूरत लागे
मन को सबसे न्यारी तेरी मूरत लागे
जब से नाम सुना है, सारा जग भूला सा है
कैसे बताऊँ क्या पाया है, गूँगे के मुँह बताशा है
बोल गुरु नाम, भज गुरु नाम, जब भी जपो ये नाम
देह को, मन को, खूब मिले आराम
नाम वो जिसे भजने से तन और मन निर्मल होवे
जग हो दलदल और मेरा, जीवन श्वेत कमल है

4
मैं हूँ चाकर

मैं हूँ चाकर परमपिता का
देखूँ खेल मैं इस दुनिया का

इक कारण भेजा मुझे जग में
तब ले आया, नया जनम ये
हमने किया वो जो उसने कहा रे
संग किसी के ना बैर किया रे
जिसने बाँटा ईश्वर को वो तो जाए सीधे नरक को
तेरा मेरा, मेरा तेरा
ये तो है बस समझ का फेरा

तेरा सुख है सुख में सबके
चल के देखो राह पे सच के
मैं जीतूँ क्या होगा चाह के
चल के देखो प्रेम राह पे
तेरी जीत में मेरी जीत है
सच्ची भक्ति की ये रीत है
मूरख मन काहे को रोए
वो जो करे तो सब कुछ होए

5
एक नूर से

एक नूर से सब हैं उपजे, कौन बुरा कौन अच्छा
मेरा तेरा फर्क ये झूठा, नाम उसका ही सच्चा

छोड़ो अब ये भरम की राहें
जग है उसमें, वो इस जग में

इक माटी से क्या क्या बनता
कितने रंग का रूप सँवरता
फिर ये राही काहे भटके
ढूँढ ले अपने मन में
एक नूर से सब हैं ....

सब मैं सच्चा बस वो ही रे
अच्छी उसकी ही करनी रे
मानो कहना तो खुश होते
उस पे ही गुरु देवा
एक नूर से सब हैं ....

भरम ये सारा दूर हुआ रे
रूप निराला जब से दिखा रे
उससे धरती, उससे अंबर
एक सभी का ईश्वर
एक नूर से सब हैं ....