Lyrics of Arpan
अर्पण
1
ॐ सदगुरु
ॐ सदगुरु चरणों में प्रणाम
ॐ सदगुरु चरणों में प्रणाम
ॐ सदगुरु चरणों में प्रणाम
ॐ सदगुरु चरणों में प्रणाम
गुरुदेव, तेरे चरणों
में प्रणाम -८
सद्गुरु ने दिया शुभ चेतना
सद्गुरु ने दिया सद्भावन
तेरे चरणों में प्रणाम ..
बहती पवन में है समय की धुन
सूरज करता है दिन का प्रकाश
सदगुरु नाम से ही मन से मन
में हो नया सवेरा
गुरुदेव तेरे चरणों में प्रणाम
फल और फूल भरे इस धरती के
सृष्टि करके गुरु कर दिया दान
जल इस जीवन में प्राण के समान
गुरुवाणी जान लो जो अमृत समान
खिला है हरेक फूल इस धरती में
माँ, मिट्टी,
मानव अनुराग में ही
मोह, माया सब कुछ
पल भर के ही
नाम का प्रकाश रहे सदा सदा
ही
मन भर देता है नीला आसमान
सवेरा सपना लाए पंछी की धुन
फूल करता है प्रकृति वरण
प्राण में प्रकाश लाए गुरु
की किरण
तेरे चरणों में प्रणाम..३
गुरुदेव तेरे चरणों में प्रणाम...
नए नए रूप लेके तुम हो सद
सुख दुख कर्म में मन में जीवन
में
तुम हो असीम तुम पूर्णानंद
रूपी
जो कुछ है सब ही तुम्हारे लिए
ही
गुरु के रूप भुवन में रात दिन
समाए
जब भी देखो सुरूप मन भर जाए
इस धरती के कण कण में
अपनी महिमा लेके तुम हो सदा
अचिंत्य ब्रह्मांड की हर दिशा
में
अनंत शासन तेरा हर काल में
हर अणु में तुम होके प्रकाश
मन में जगाया इक विश्वास
गुरुदेव तेरे चरणों में प्रणाम....
बहती पवन में है तेरा ही नाम
बहती नदी में वो ही है अविराम
काल बिखेरता है तेरी मुस्कान
ज्योत से उजाला सारा आसमान
तेरे ही रूप से जागृत होके
सूरज चंदा ने सब फैलाए उजाले
इस सारे जग में जो भी है महान
गुरुदेव वो सब तुम्हारा ही
दान
समय की राहों में है आना जाना
एक ही दिशा एक ही घर एक ही
ठिकाना
तेरे ही द्वार पे लेंगे शरण
सजा के हृदय पर तेरे ही चरण
गुरुदेव तेरे चरणों में प्रणाम....
2
हृदय में जब तेरी सूरत
हृदय में जब तेरी सूरत मिले
अंधेरे में
छा गई तब खामोशियाँ तेरे उजालों
में, गुरु !
जो भी मेरा खो गया था
मिल गया सब कुछ अब मुझे
भर गया अब मेरा जीवन
पाया तुझे मेरा ये मन
मन मेरा अब जहाँ रहे
तेरा आदेश सुनता रहे
सब मुश्किल हो जाए आसान
तेरे नाम से ही गुरु तेरे नाम
से ही
हृदय में जब तेरी सूरत ...
जीवन सूरज ढल जाए जब
मौत की आगोश में गुरुदेव
फिर भी तड़पता रह जाएगा
दर्शन की प्यास में
मेरी भक्ति ज्योति जला के
सारी माया जग भूल के
रहना चाहता हूँ मैं सदा
तेरे शरणों में गुरु तेरे चरणों
में
हृदय में जब तेरी सूरत ...
3
गुरुनाम भजो
गुरुनाम भजो सदा
मिलेगी मुक्ति तुम्हें
सोचते हो इतना भी क्यों
गुरु जो है साथ तुम्हारे
गुरु भजन मधुर ध्वनि
मन में सदा बजते रहे
सुबह शाम हृदय भवन
गुरु से ही सजते रहे
आँखों से ना देखो उन्हें
सदा है वो अहसासों में
सारा जग है उनकी माया
हम हैं उनकी परछाइयों में
करके पूजा करके तीरथ
मिलेगी बस उनकी मूरत
देखो कभी अपना हृदय
देखोगे तुम उनकी सूरत
समय के ही बीच भ्रमर में
जीवन अगर फँस जाए तो
गुरुनाम कर स्मरण
और आगे चलते रहो
4
तेरे चरण करके
तेरे चरण करके स्मरण
देख रहा था मैं जब तुम्हें
छोड़ के तब अपना आसन
तुम उतर आए
लेकर गए पास तुम्हारे
मैंने जो हार बनाए
तेरे चरण छुए जब मैंने
तन में मेरे कंपन लगे
जोड़ा तुने मन में मैंने
प्यार का बंधन
इस जहाँ की हर दिषा में
ज़मीं से लेकर नील आसमाँ में
हर किसी में समा के तुम
सजाय भुवन
नयन तेरे रूपसागर में
डूब रहा है मन ही मन में
तेरा स्पर्श लेकर हृदय
सँवारा जीवन
प्राण में तेरा नाम लाया है
नई भाव लहर
देखता रहूँ ऐसे तुझे
मैं तो जीवन भर
तेरे चरण करके स्मरण....
5
हरिनाम करके
हरिनाम करके देखो
मन उज्जवल हो जाए
मन उज्जवल हो जाए तो
सब अंधेरा खो जाए
हरिनाम गुरुनाम
भजोनाम सुबह शाम
जिन राहों में आना जाना
लगता है वो सब पहचाना
मगर उन्हीं राहों में ही
अंत में है सब ही खोना
कुछ भी ना रहेगा साथ
गुरु हरि नाम बिना
भजो मन हरि हरि
स्वर्ग होगा ये जग
कोई नहीं अपना तेरा
अपना तो बस हरिनाम
अब सोचो क्या किया है
क्या दिया है क्या पाना
हरिनाम भजो तो फिर
सुखदायक है सब ही
जय होगी हर रण में
हार ना होगी तेरी कभी
हरि गुरुनाम से देखो
दीप्त हुआ ये संसार
6
प्रभु सुंदर तुम
प्रभु सुंदर तुम मंगल करो
अपने चरन धूल से
ज्ञान की ज्योति से जगाओ मेरे
मन में करम प्रेरणा
सफल होगी साधना
मैं हूँ दीन परिचय हीन
कैसे पाऊँ मैं तुमको
कैसे लूँ मैं तेरा परस
कुछ तो दिशा दो हमको
मन का अंधेरा मिटा दो मेरा
देदो नया सवेरा
तेरे प्यार की दिया से प्रभु
तेरे प्यार की दिया से
दर्द से अगर भर जाए मन
ना रहे कोई सहारा
फूल बन के मैं पूजा करूँ
चरणों में तुम्हारे
सदा मेरा मन करूँ अर्पण
तेरे चरण पूजने
भजूँ सदा तेरा नाम प्रभु
भजूँ सदा तेरा नाम
7
गुरु चरण करके
गुरु चरण करके स्मरण
बिताऊँ जीवन
आनंद ही आनंद में
रहो तुम मगन
सब कुछ उन चरणों में
कर दो अर्पण
हर दिशा में गुरुदेवा
हर रूप में गुरुदेवा
हर नयन में गुरुदेवा
जैसे ये दर्पण
पाओगे तुम पास अपने
बुलाओ जो तन मन से
तन मन कर दो अर्पण
वो तो सदा ही है सदा ही है
सुख का कारण
सदा अत्य महा शक्ति
मुक्ति दाता गुरुदेवा
प्रेम पुरुष बन के गुरु
सजाया भुवन
कर्म है जो धर्म है वो
धर्म में ही गुरुदेव
करो ध्यान गुरुदेव
सदा मन ही मन मे गुरु नाम
करो सुमिरन
8
जीवन मधुर हो तो
जीवन मधुर हो तो बार बार देखता
हूँ
तेरा मधुर रूप तन तन से
चाहा है जैसे मैंने वैसे ही
आके तुम्हें
मुझको तूने अपनाया बड़ी कृपा
से
अतिरूप ज्योति लेकर त्रिभुवन
में समाकर
आया है तू पास मेरे लेने मुझे
मैं तब आनंदित होकर ध्यान ज्ञान
सब खोकर
देखता रहा हूँ बस मैं तो तुझे अहसासों में
कमल पद्मासन अपरूप ज्योति लिए
बैठे हो तुम सदा हँसते हुए
करके वो दरसन धन्य ये दो नयन
भेंट किया चरणों में मैंने
खुद से
नयनों में आँसू आए इतनी खुशी
जो दी है सब कुछ भूल गया
तुम्हें देखकर अब क्या चाहिए
हमें
पा लिया जब तुम्हें अपने हृदय में ही जनम जनम
9
खुद को भूल के
खुद को भूल के देखो ना तुम
इस भुवन की हर एक दिशा
बदलती हुई जीवन की रूप
समय की लहरों में
अपना तेरा कुछ नहीं है
बस है सद्गुरु
काम तेरा क्या, बोलो क्या
करोगे
क्या है तुम्हारा, तुम क्या दोगे
अब जो तुम्हारा कल ना रहेगा
ये तो सभी माया
जहाँ पे सवेरा, वहाँ पे अंधेरा
क्या है तेरा, क्या है मेरा
कुछ ना रहेगा कुछ ना रहेगा
छोड़ना तो है सभी
क्या किया तुम इस जीवन में
सोचा कभी तुम मन ही मन में
सब कुछ पाके फिर भी तो तुमने
कुछ भी तो नहीं पाया
मौत जब तेरा छीन लेगा सब
कुछ ना रहेगा पास तेरे तब
खाली हाथ तब जाना पड़ेगा
छोड़ के ये संसार
10
गुरु नाम लेते रहो
गुरु नाम लेते रहो सदा तनमन
से
तभी तो मिलेगी दया
सब कुछ भूल जाओ
नाम सदा लेते रहो
मिलेगा सुख साया
गुरु पिता माता है इस सारे
जग में
हम उनकी संतान
गुरु के चरण में ही स्वर्ग
मिलेगा तुम्हें
सभी तो उनकी कृपा
पास उनके सब कर दो ना अर्पण
सुख दुख ज्ञान ध्यान जनम मरण
गलत ना रहो और भटको ना अब तुम
गुरु जब साथ तेरे ज़रा भी ना
तुम सोचो
क्या पाया और क्या खोया
शायद कभी सोचोगे तुम
क्या मिलेगा करके भजन
गुरु जब साथ ना तुम सोचो
मन को करके वश
भजगुरु भजगुरु सदा सुबह शाम
झाँकते रहो तुम खुद के हृदय
में
भूल जाओ बाकी सारे जग के विषय
में
नाम की महिमा होगी मन में प्रकाश
अपने ही साथ रहो गुरुनाम लेते
रहो
सुख में बीतेगा जीवन
भटके हुए मन को लेके
रख दो ना अब अपने ही पास
गुरुनाम लेके अब जीवन सफल होगा
सदगुरु गुरुनाम लेते रहो सुबह
शाम
डूब जाओ नाम के ही सागर में
तुम
11
छोड़ के सब ही
छोड़ के सब ही साथ तुम्हारे
चलूँ मैं खुशी से
मन में सदा रहेगा अब
आसन तेरे लिए
तेरे प्रेम के उजालों में
हर वासना मिट जाएगी
दुख सुख के इस जीवन में
तुम हो पास हमारे
जो भी आया पास तुम्हारे
रह गया जो साथ तुम्हारे
भर दिया तूने खुशी से मन
तेरी ही कृपा से
छुआ जो अब तूने हृदय
हर डर को कर लिया जय
बंधन ना रहेगा अब
टूट जाएगा सब ही
नए नए रूप तुम्हारे
हर लिया मन को सारे
कर लिया है अपना हमें
आपकी दुआ से
12
और ना रहो
और ना रहो मन की गुम राहों
में
मिल गई जब नई किरण क्यों हो
अंधरों में
मिल गई जब भक्ति हृदय में
मिल गई जब तेरी कृपा डर क्या
जीवन में
तन मन एक करके अब सोचो मेरे
प्यारे
इस जहाँ में गुरु बिना अपना
कौन है तेरा
और ना रहो .....
मन में हो तेरे सदगुरु का ध्यान
सफल होगा जीवन तेरा लेकर गुरु
का नाम
ब्रह्म सत्य गुरु वचन मान के
चलो तुम
भजो गुरु जपो गुरु गुरु शरण
रहो
और ना रहो