Lyrics of Jaagran
जागरण

1
नमन तेरे चरण में

नमन तेरे चरण में
गुरु नमन तेरे चरण में
देखा प्रभु वही बार बार मैंने
तेरा रूप सलोना
मन दरपन में

मेरे विश्व पिता तुम्हीं
तुम ही इष्ट गुरु
शेष हो भक्ति यहीं
हो यहीं शुरू
जग के हो रखवाले
तुम्हीं पालनहारे
लेके चलो शांतिपथ पे
नैंनों के उजियारे
हरिनाम, हरिनाम, हरिनाम, भजमन
गुरुनाम, गुरुनाम, गुरुनाम, हरछन

तुम ही हो नारायण
हरि हो तुम्हीं
तेरे सिवा कौन मेरा
और कोई नहीं
नाम तेरा पावन ऐसा
इसे नहीं छोड़ूँ
नाम संग नाता जोड़ा
कभी नहीं तोड़ूँ
हरिनाम, हरिनाम, हरिनाम, भजमन
गुरुनाम, गुरुनाम, गुरुनाम, हरछन

2
गुरु आया मैं

गुरु आया मैं तेरी शरण
होंठों पे बस तेरा ही नाम
कृपा करो प्रभु कृपा करो प्रभु
कृपा करो भगवान

याचना लेके आया हूँ, तेरे ही द्वार
दान दे दो, नाम अपना
हो जाऊँ भव पार
तुम हो जहाँ, हम हों वहाँ
तुझसे हो अपनी पहचान

भूलें सारी माफ़ करना तुम
पथ दिखाना राहों में जो
हो जाए कहीं गुम
हाथ पकड़ के राह दिखाना
कर देना हर पथ आसान

3
भोर की पहली

भोर की पहली किरण देखी
तेरी सूरत रची बसी है
सौंप मन को, भर नयन को
राह तेरी मुझे तब मिली है
अब ना राहें जुदा करना
प्रार्थना मेरी यही है

सुख की राहें मिलें या ना मिलें
लेकिन मन में भरी खुशी हो
खुशियों का मिले कभी जो सागर
फिर ना मन दुखी हो

देखा नहीं है तुमको लेकिन
अपने हो गए हो
चाँद सूरज जैसे तुमसे
उज्जवल हो गए हों

दुनिया मेरी तुम जहाँ हो
मन ये मेरा वहीं पे भागे
दरसन करके सोचेंगी आँखें
देख तुम्हीं को जागे

सीमाओं भरी दुनिया में बस
तुम हो सीमा हीन
भक्त तुममें और भक्तों में
तुम हुए हो लीन

4
जीवन के चार दिन

जीवन के चार दिन गुज़र यूँ जाएँगे
ये तो बता तूने सोचा था क्या
आस निरास में दिन ढल जाएँगे
ये तो बता तूने जाना था क्या

भूल से भी भूल कोई करना नहीं
कर्म तेरा हो जहाँ मरना वहीं
सब कुछ पा के तूने खुद को खोया
सोच ए देखो बदले में क्या है पाया

जाने अनजाने पथ पे चालता ही जाए
लगे कभी ठोकर तुझे कौन बचाए
भूल भुलैया में तुम खो मत जाना
जो भी है उलझनें उन्हें सुलझाना

5
खुले हुए गगन

खुले हुए गगन तले
ताल पे पायल देखो बजे
अपनी धुन में रमता जोगी
नाचता ही फिरे
जोगी वो मेरा अपना लगे
मन का मीत रे

रोज़ सवेरे पंछी चहके
आते हैं तब वो झूम झूम के
एक ही धुन पे जग रिझाने
बस नाम तेरा लेके
सारे जग को करे अपना
मधुर हँसी हँस के

ऐसी सूरत कभी ना देखी
जैसा रूप है वो लेकर आए
रंग अनोखा रूप अनोखा
लीलाएँ दिखाएँ
प्रेम के बंधन में वो बाँधे
सारी दुनिया कसके



6
प्रेम की सच्ची मूरत

प्रेम की सच्ची मूरत हो तुम
सब तुझपे अर्पण
करूणा सागर, कृपा सिंधु
तुझसे ये जीवन

हर कहीं पे, हर किसी से
ऊँचा है तेरा नाम
तुझसे मिलके, एक हो के हमें
मिला है महाज्ञान
मिला है जो मोती, इसे नहीं खोना
तेरे सिवा कौन है हमारा गुरु मुझसे कहना

धरती पर तुम हो आए
सुन मेरी पुकारें
तेरी छुअन से जीवन पथ पे
छा गई बहारें
लौ से लौ है जलाई
प्यार भरे हाथों से
वो उजियारा दूर करे प्रभु
अँधेरा रातों से

7
फिर हो गया है

फिर हो गया है मन हर्षित
मुक्त किया मुझे माया बंधन से
बनाया है तुमने, रे मन मीत

प्यार दिया मेरे मन को
प्रेम की डोरी से बाँधा है ऐसा
धन्य हुआ मेरा ये तन
कैसे मैं भुलाऊँगा दान तुम्हारा
पावन किया है मन था पतित

तेरे नूर से मैं चमकूँ
हीरे मोती कुछ ना मैं अब चाहूँ
खुद उन जैसा दमकूँ
ऐसा है तराशा तूने एक पत्थर को
देखता है जग अब हो के चकित

मन का ये दीप रोशन
तेरी ज्योति मुझमें ऐसी समाई है
उज्जवल हुआ सारा जीवन
मेरा सुख दुख अब तेरे चरणों में है
मन कहीं अब ना होगा भ्रमित

8
रहे हर्षित मन मेरा

रहे हर्षित मन मेरा, देना प्रभु वरदान हमें
तेरी ही लीला नए रूप में, मिले जहान में
नवीनता में तुम मिलोगे, है यही अभिमान हमें
रहे हर्षित मन.....

हर किसी की नज़र से बचाया हमें
झूठे अहंकार ने ना घेरा हमें
तुमको ही देखें नए प्रकाश में
इस धरा में तुम बसे तुम आकाश में
रहे हर्षित मन .......

शरण है तुम्हारी, तेरा ही सहारा
दीन दुखी को इस भंवर से तुमने ही उबारा
तेरी ही महिमा सजी है मेरे जीवन में
मुक्ति भी मिलेगी प्रभु तेरे चरण में
रहे हर्षित मन .......

9
अपनी भक्ति से ही

अपनी भक्ति से ही भर दो
प्रभु मेरा जीवन
शांत कर दो जो है चंचल
प्रभु मेरा ये मन

लगता है तुम्हीं थे हमेशा
मेरा वो ध्रुवतारा
जब तलक ना मिले थे
भटका बेसहारा

प्रभु दिल ही दिल में जाने क्या क्या
मेरे मन ने कहा
तेरे मिलने की आस लेके
दुख है सारा सहा

जहाँ रहे तुम वहीं मेरा
बन गया ठिकाना
तुम हो मेरे एक अपने
जग सारा बेगाना
प्रभु नाम तुमने मुझको जो दिया
वही अपना मेरा
मुझे जगा के जो दिखाया
वही सपना मेरा

10
गुरु जब से मुझे

गुरु जब से मुझे तुमने अपनाया
मेरे प्राणों में बसा तेरा ही नाम
छोड़ के सब कुछ आया हूँ दर पे
दया करो भगवान

दुनिया के हर रूप में तुम्ज
छाँव में तुम हो, धूप में तुम
पथ की थकान दूर की तुमने
अब यहीं रहने का दो फरमान

कभी कुछ भी जो करूँ मैं याद
कहीं ना कुछ रहे, इक तेरे बाद
मन पे लगी है ऐसी प्रेम छुअन
आँखों में बसा वही रूप महान

11
चुप रहा मैं

चुप रहा मैं हर छन
दर्द भरा मेरा जीवन
तुमने भी नहीं सुनी, वो अनकही
सब कुछ सहता रहा, मन ही मन 

छोड़ा सबने ही मुझे, रहा तन्हा
रहा मेरे संग आज कर्म मेरा
आँख मिचोली खेले सुख मेरे संग
दुख एक साथी बन के संग रहा
यादों में ही पाता हूँ मैं पल खुशियों के
वापस फिर जाता है मन पास यादों के

बीता हुआ पल जैसे एक परछाईं
चले संग जैसे इक हो हमराही
सुख और दुख का है साथ अनोखा
बावरा ये मन मेरा, ना समझा
जाता है जो पल, वो लौट के आए
कोई ना ये जाने क्या वो, रंग दिखाए

समय ने आके आज ऐसा पुकारा
जाना होगा संग संग दूर किनारा
पंछी ने पंख खोले उड़ता जाए
दूर है फीका घर कौन पहुँचाए
जीवन भी पंछी जैसा इसको भी जाना
यहीं पे पड़ा रहेगा इसका ठिकाना

12
दर पे गुरु के

दर पे गुरु के जाए वही
जो है मन का पक्का एक सिपाही
दो धारी तलवार पे चल के
किसने राहें पाईं
है भरोसा पूरा जिसका
राह गुरु की है उसी ने पाई

गुरु चरण तज के जो मन, लेता शरण दूजा चरण
छल और कपट से मिलेगी तुझे, मन की भटकन
भूल भुलैया जगत ऐसा, भूल भुलैया अरे मन
मिले कहाँ ऐसी शरण
मन की मान चलेगा जो, राह सही उसने नहीं पाई

अहम से ये मिले नहीं, बाँधे से ये बँधे नहीं
अपना अपना कहेगा जो, दुख पाए वही
गुरु हैं सबके लिए, गुरु है अरे मन
आते हर युग में हैं
मन को धीरज दिया जिसने
राह गुरु की है उसी ने पाई

देखो दीपक जहाँ जले, अँधेरा है उसके तले
फूल खिलाए माली लेकिन पूजा नहीं करे
नदी तीरे रहे मगर गंगा ना नहाए अरे मन
गुरु संग रहके भी मन
सूरत वो पहचान नहीं आई

13
प्रभु तुम्हें इस जीवन में

प्रभु तुम्हें इस जीवन में पाया है
मुक्ति का पथ चाहिए नहीं
जब जब धरती पे आओगे प्रभु
तब तब मिले मुझे चरण वही, प्रभु चरण वही

तेरा जो रूप मैंने देखा है
सुनी हैं जो बाते तुमने कही
वही रूप लेके प्रभु आना बार बार
मुझे संग लेना लेकिन
भूलना नहीं प्रभु भूलना नहीं

चुन चुन लाया हूँ फूल कई
माला गूँथी उन फूलों से ही
फूल आस के, डोर अँसुवन की
अर्पण चरणों में करूँगा वही
प्रभु करूँगा वही

तेरा ही नाम सदा रहे मुझे याद
तुझसे है इतनी सी मेरी फरियाद
मन की लगन लगी रहे तुमसे
बुझ पाए ना ये भक्ति की लौ कभी
भक्ति की लौ कभी....