Lyrics of Samarpan
समर्पण

1
ॐ कृष्णाय

ॐ कृष्णाय वासुदेवाय हरए परमात्मने
प्रणत क्लेश्नाशाय गोविंदाय नमो नम:
ॐ जटिने दंडिने नित्यं लम्बोदर शरीरणे
कमंडल नि:संघाय तस्मै ब्रह्मात्मने नम:
मंत्र सत्यं पूजा सत्यं सत्यंदेव निरंजनं
गुरुवाक्यं सदासत्यं सत्यमेव परम पदम
अखंडमंडलाकारं व्याप्तम येन चराचरम
तत्पदम दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरुवै नम:

2
भाष्यपाठ

हे ब्रह्ममय, विश्व पिता, मेरे गुरुवर, मेरे अंधे मन के ज्ञानचक्षु
आपकी दी हुई शक्तियों को संचित कर आपको प्रणाम करता हूँ । 
आप अपने वरदान से हमारे समस्त अपराध क्षमा कर दें । 
हमारे अंतस को कालिमा विहीन करें ।  इसे पावन बना दें । 
मोह माया के बंधनों को काट कर हमारे अंतर्मन में निवास करें । 
हृदय में आपका ही वास हो । मेरा हर कर्म आप द्वारा ही संचालित हो । 
मेरे अंतर्मन में बसी अपनी शक्तियों को दिन रात जागृत रखें । 
मुझे हमेशा रहे स्मरण कि ये सारी धरा आपकी ही लीला भूमि है । 
आपका आशीष हमें छल कपट और झूठ से दूर रखे । 
इस धराधाम के हर घर में, घर घर में आप शांति का संदेश फैलाएँ ।
 समस्त विश्व में अपनी संतानों के नेत्र खोल कर उन्में अपने ज्ञान का आलोक भरें | हमारे मन, वचन और कर्म को पाप मुक्त करें । हमारा जो भरोसा आप में और जो विश्वास सत्य के प्रति है वो भरोसा वो विश्वास हमेशा बना रहे । 
शारीरिक, मानसिक, प्राकृतिक, हर तरह की बाधा विपत्तियों से हमारी रक्षा करें ।
 हम जो भी करें आप्का नाम लेकर करें । आपकी छवि अपने हृदय में रखें और हम उसी ध्यान में डूबे रहें ऐसी शक्ति का संचार करें । 
हे मंगलकारी गुरुवर, हमें विश्व की सेवा करने का अवसर प्रदान करें । 
हृदय में अपनी भक्ति दें, आनंद दें, शांति दें, हमें आशीर्वाद दें हे गुरुवर नित्य प्रतिदिन हम उन्न्ति के पथ पर चलें, उन्नति के पथ पर, आत्मा की उन्नति । 

3
कह के  मैं क्या सुनाऊँ

कह के  मैं क्या सुनाऊँ, देख लो दो आँखें भर
दया के वो सागर हैं मेरे गुरुवर

करना जो चाहे दरसन, अपने मन में कर ले
और कुछ चाहे ना वो, प्यार से नाम भज ले
दौड़े चले आते हैं वो, प्यार भरी बानी सुन के
मिल नहीं पाए जो रखे, जाल अहम वाले बुन के
कह के मैं क्या ......

मानव रूप पाया, काट जन्मों का बंधन
व्याकुल मन से पुकारो, नाम कर के दो नयन
पूजा का ना कर दिखावा, खुद से ना आँखें चुरा
अब से भी जाग जा तू, आँखें अपनी खोल ज़रा
कह के मैं क्या ...


4
इस जीवन में मैंने अपने

इस जीवन में मैंने अपने, खुशी जो भी पाई
तेरे ही चरणों की धूल, माथे जब लगाई

जब से मेरे नैनों से, तेरे नैन मिल गए
एक पल में मन के सारे, मैल धुल गए
जो कुछ भी है मेरा, मेरा, मेरा
है तेरे चरण में
इक छुअन से हुआ उजाला
अंतरमन में
इस जीवन में.....

जब से तेरे अधरों से है, पाई अमृत की धारा
मेरे मन में भर गया है तेरा ही उजियारा
अब तो है ये मन रमा मेरा तेरे भजन में
आ के बस गए हो तुम्हीं अंतरमन में
इस जीवन में.....


5
दूर से जितना देखूँ


दूर से जितना देखूँ तुमको अपने लगते हो
आके भी करीब क्यूँ छिपने लगते हो

सूरज और चंदा तेरे रूप में चमके
पग छुएँ तेरे फूल सभी अंजली बन के
बहती नदिया का ये पानी तेरे ही पग पखारे
आके उसको हैं सुखाते पवन के झकोरे
दूर से जितना....

अपनों में बसा है जो वो रूप है तुम्हारा
तुम हो खामोशी तुम्हीं हो ज़ोर का हुँकारा
अंतहीन हर सीमा में तुम ही असीम रहे
सगुण हो या निर्गुण बस एक ही तू दिखे
दूर से जितना....

दास चरणों का हुआ मैं, देखा जब से तुमको
जीवन अपना सौंप के बस, पूजा है एक तुमको
सुनो प्रभु बस तुम बसे हो रोम रोम मेरे
निराकार का दरस किया धन्य नयन मेरे
दूर से जितना....


6
हो गया मैं बेठिकाना

हो गया मैं बेठिकाना, अपना घर छोड़ा
घर का मिला मालिकाना, तुझसे नाता जोड़ा

है सराय सारा ये जग, है क्या इसपे किसीका हक
एक ही कमरा मिलेगा, इससे अधिक माँगना मत
मौज मज़े में रहेगा, उसका जीना निरर्थक
है सराय सारा ये जग, है क्या इसपे किसीका हक

अपना या बेगाना नहीं, सब यहाँ पे मिलके चले
मन से मन का मेल हो जब, अपना यहाँ कुछ ना रहे
भक्त और भगवान बीच ना कोई दीवार रहे
है सराय सारा ये जग, है क्या इसपे किसीका हक


7
तुझमें मुझमें ना कोई

तुझमें मुझमें ना कोई अंतर जान लिया ये प्रभु
मुझको अपनाया, अपना स्वर दिया है प्रभु

अपने पास बुलाके मुझे, संग अपने बिठाया
अपनी रोशनी से ही सारे भेदों को मिटाया
जितना भी मैं जानूँ तुमको पर तुम तो अनजाने हो
लगता है आभा तुम्हारी सब तरफ़ है दिखती
तुझमें मुझमें ना कोई .....

बाहर जो देखूँ रखा है दूर अपने से
तुमने अपना माना मुझको अंतरमन से
गूँजती है तेरी वाणी तन और मन में
मैंने खुद को सौंप दिया तेरे ही चरण में
तुझमें मुझमें ना कोई .....


8
देस परदेस

देस परदेस घूमता फिरा, नई नई राहों से गुज़रा
आके सब कुछ ही चला गया, मेरे संग तेरा नाम ही रहा

बदल के रूप खुशियों ने भरमाया, भागता ही रहा मैं यहाँ से वहाँ
छाता रहा नित नया मन पे नशा, रूप एक बस मेरी आँखों में बसा
नया नया रंग मेरे चित्त पे लगा, हर कोई फिर उसी रंग में रंगा
नी नई खुशियों ने मुझे अपनाया, वही रूप मैंने जब मन में बसाया
देस परदेस घूमता फिरा....

सपनों का देश वो कितना सुहाना, एक ही लगन में मन का लगाना
बंद हुई राहें जिनपे थी चिंताएँ, मैं तो रह गया संग बस नाम के
दुनिया में जहाँ भी नज़रें जाएँ, कण कण में तेरा ही दरसन पाएँ
रोशनी तेरी अब हमें है मिली, बन के आवाज़ मेरी साँसों में है घुली
देस परदेस घूमता फिरा....

तुमको ही देखा मैं जहाँ जहाँ गया, तेरी लीलाओं से सजी सारी दुनिया
दुनिया का हर रूप तुझमें समाया, देख देख मुझे तेरा मन हरसाया
उजियारा तेरा जब मुझे मिल गया, प्राण मेरा जैसे इक मोर बन गया
भक्ति का बादल मेरे जीवन में छाया, तेरा नाम खुशियों का सावन ले आया
देस परदेस घूमता फिरा....


9
खोया मेरा मनवा

खोया मेरा मनवा एक और मन में
चला है ये जानूँ ना कौन लगन में

नदिया बस बहती चले, किसकी आस में वो बहे
सारे बंधन तोड़ बहे
मेरी जीवन धार प्रभु मेरी जीवन धार
खत्म हुआ सफ़र आके, तेरे चरण में प्रभु
खोया मेरा मनवा ....

फूल सुबह की लगन में, रात जग के बिताए
मेरे दिल की भी लगन
अपनी ही समझो प्रभु अपनी ही समझो
खत्म हुआ सफ़र आके, तेरे चरण में प्रभु
खोया मेरा मनवा ....


10
प्रभु तुम हो

प्रभु तुम हो मेरे प्राण
अँखियों से मैंने देखा, सारा ये जहाँ
जो है वो सब है, तेरा ही दान
प्रभु तुम हो....

कभी ना निराश किया, मुँह नहीं फेरा
तुमने सफल किया हर काम मेरा
अब चाहूँ चरणों में तेरे रहूँ
हम हैं तेरे भक्त प्रभु, पुत्र के समान
प्रभु तुम हो....

एक ही बात मेरे मन में बसी
और नहीं साथी मेरा, एक तुम ही
एक ही कामना है मेरे मन में
मुझको बचाना माया बंधन में
प्रभु तुम हो....


11
अपनाओ, ना अपनाओ

अपनाओ, ना अपनाओ, मैं तो हूँ तुम्हारी
चरणों में पड़ी रहूँ, याद में तुम्हारी

एक रोज़ रात के अँधियारे
आई थी मैं द्वार पे तुम्हारे
बिना रोक टोक चली आई
खो के खुद को मैंने तेरी प्रेम जोत पाई
अपनाओ, ना अपनाओ...

मेरे सूने मन के आँगन में
जैसे कोई आया
तेरे दर पे दीप इक जलाऊँ
जाना तुम्हें या ना जाना, बोल नहीं पाऊँ
अपनाओ, ना अपनाओ....

तेरे हर सृजन में रहूँ
जो है मेरा अर्पण करूँ
ध्यान में ये मन लगा के
तेरी ही छवि हमेशा मन मेरा निहारे
अपनाओ, ना अपनाओ.....

12
मेरे इन गीतों को

मेरे इन गीतों को मिल गया है सुर तुम्हारा
अब मैं गुज़ारूँ जीवन, जप के नाम बस तुम्हारा

दिल में मेरे तुमने अपनी सच्ची जोत जला दी
एक राह सच्ची वही तुमने मुझे दिखा दी
तुमने इनकार किया, पूजना था मैंने चाहा
दीपक इक जला के, दीपक इक जला के
मेरे इन गीतों को....

जब भी आँखें बंद करूँ, देखूँ छवि तुम्हारी
इस ज़मीं से आसमाँ तक महिमा है तुम्हारी
जितने भी हैं फूल मेरे पास चढ़ाऊँ तुम्हें
अर्पण करूँ जो है मेरा, उसी श्री चरण पे
मेरे इन गीतों को....

सामने बैठ के तेरे बस तुझे निहारूँ
जीवन को तुझसे मिलाके सफल इसे करूँ
जितनी भक्ति मन में भरी तुझमें ही लगाऊँ
करूँ भक्ति सारा जीवन, दान है ये तुम्हारा
मेरे इन गीतों को....

13
प्रभु तुमसे इतना

प्रभु तुमसे इतना जीवन में है पाया
दुख ना होगा गर आए बुलावा

कभी दुख कभी सुख की छाया
जीवन ने क्या गीत सुनाया
हर रूप में आके तुमने
मुझे है बहलाया
दुख ना होगा गर आए बुलावा

जब से मेरे दिल में बसे हो
कुछ ना रहा अधूरा
मेरा था सौभाग्य पाया
आशीर्वाद तुम्हारा
तुम हो मेरे साथ, मैंने इतना ही है जाना
दुख ना होगा गर आए बुलावा

नाम मेरा तुझमें मिले, मुझे मुक्ति मिल जाएगी
तुमसे ही लूँ जनम दोबारा, ये इच्छा सताएगी
तेरे नाम से ही मुझे सब करें पुकारा
दुख ना होगा गर आए बुलावा

14
मन की गहराई में

मन की गहराई में देखा, कोई नहीं था मैं ही मैं था
एक जनम तूने दिया तुझमें फिर जनम लिया
सब अहसास किया अपने हृदय में
तुमने अहसास दिया मेरे हृदय में

तेरे ही प्रकाश में मैंने जीवन जोत जलाई
सारी शोभा दुनिया की तुमने दिखलाई
हृदय में ये नाम तुम्हारा कभी नहीं मिटने वाला
भीड़ हो मगर मेरे संग रह के
जगा के रखा है विवेक मेरे हृदय में
मन की गहराई में देखा.....

मेरे दो नैनों से होकर, प्रेम जी में समाया
अपने उजाले में मुझे, संग तूने बिठाया
प्रेम भरे उजाले को, मेरे दिल तक पहुँचाया
तुम हो मेरे पास, आनंद स्रोत बन के
सब कुछ है लुटाया मैंने तेरे चरण में

मन की गहराई में देखा....