Lyrics of the album
PAAVAN
1
भजो भाई
भजो भाई गुरु नाम लेलो भाई गुरु नाम
गाओ भाई गुरु नाम सब मिलके
जो पूजे श्री गुरु पदरे
वो ही पाए उसके इष्ट को
नवरूप में नारायण में गुरु ही पूज्य
ईष्ट रूप में हृदय में हम पूजते गुरु को
गुरु बिना कुछ नहीं धरो गुरु वाक्य
सर्वमत से श्रद्धा दे के साथ अपने रहो
पास तुम सदा रहो गुरु दिन में रात में
चाहूँ बस तुझे पाऊँ साँसों की सरगम में
गुरु मूरत ध्यान मूल गुरुपद पूज्य
गुरु वाक्य श्रेष्ठमन्त्र सदा याद रखना
गुरु प्रदर्शित पथ में अनुगत रहो
गुरु कृपालय में अविराम नाम करो
परमतीर्थ गुरु सेवा धरम गुरु निष्ठा
जगत ब्रह्मांड तुष्ट है गुरु सेवा में
एक भगवान है गुरु सब ही का
पथ अलग मत अलग से ही होता है
किसिके मत पथ लेके तर्क नहीं करो
गुरुदेव जो कहे वही वाक्य धरो
सत्य बिना गुरु नहीं गुरु ही सत्य
सत्य का पालन करना अवश्य कर्तव्य
गुरु मन रखना तेरी ओर रहूँ सदा ध्यान में तेरे
रखना तुम सबको चरण में तेरे
2
जीवन में मरण में
जीवन में मरण में निखिल भुवन में
नहीं कोई बेगाना जानने से तुम्हें
कितने अनजानों से मिलाया आज
पहचान सब से कराया
हाथों में तेरे सौंपने खुदको
मैं हूँ यहँ अकेला बैठा
बहुत मुझे देर हो गई
मेरे ही अपने दोष के लिए
बिसर गए तुमको स्वामी अपने तरंग में
सत्य में तेरा पूरन प्रकाश देखे है इस भुवन में
ये मेरा दिल तुझसे प्रभु नित्य सदा सत्य होगा
ये मेरा मैं ना रहेगा तुझमें जाके समा जाएगा
कब हे प्रभु तुमने आके बुलाया है मुझे
फिर से कहाँ छुप गए तुम
दूर से किस दिशा में
मेरे होक्जे उतर आए
सहज कोई प्रेम में तेरे
दीप जलाए प्राण में मेरे
दीप की तेरे लौ से प्रभु
मेरे जो है बिखरे जहाँ
जीवन में मरण में
सब मिले हैं जैसे आके
चरण में तेरे
समझ के आज
समझ के आज समझा है तुम्हें
कुछ ना जान के
अर्थ की सीमा ना पाके भी
तेरी ही वाणी प्राण में आई
तुम हो लोक से लोक से लोकांतर में
वो खबर आज आई पल में प्राण में मेरे
द्वार मेरे तोड़ के तुम पास आ गए
जैसे तुम एक हुए घर बाहर में
भाषा आज खो गई लब से मेरे
चुप अचल आज सब हो गए
समझ के ....
सन्नाटे हैं आज जैसे हृदय में
पाया है जान तुम्हें मैंने इसमें
जो भी कुछ कहे कह दे तेरे बारे में
मायूसी में कोई लौटे चाहता नहीं मैं
भरा है मेरे प्राण तेरी ही वाणी से
जानते हो तुमही प्रभु कोई नहीं जाने
समझ के .....
4
मन मेरा दे दिया
मन मेरा दे दिया तुम्हें
ले लिया खुद के पास देकर प्राण मेरा
सदा तूही है प्रभु हृदय में मेरे
प्रार्थना किया मैंने बार बार स्वामी तुमसे
माया बंधन में कभी हमें ना बाँधो
हुआ है व्याकुल प्राण तेरे ही लिए
तेरे सन्नाटे में कब बुलाओगे
हृदय तन में स्वजन में निर्जन में
प्रभु तुम ही बैठो आके परम निर्जन में
मन मेरा दे दिया ....
जितना करम ही दो भूलने तुम्हें ना देना
रखना हमेशा मुझे जोड़ के तुझी से
आत्मा जैसे दिन रात बहती लहर में
हर एक कोशिश लेके तेरी ओर जाए
सारा जीवन की पूजा तेरे चरण में
समर्पण किया मैंने आँखों के आँसू में
मन मेरा दे दिया .....
5
द्वार को मेरे
द्वार को मेरे खोल दिए अपने हाथ से आके
सातों लोक की खामोशी आ गई प्राण में मेरे प्रभु
तुम्हारी इच्छा कर लो पूरन जीवन में आज मेरे
द्वार को मेरे ...
इतने दिन जो थे मेरे प्राण में
हो गया अंत आज उसका मेरे जीवन में
मेरा ये मैं साथ तेरे
कब है आके मिल भी गया
कोई नहीं है जो छुपा ले
तुमको मेरे मन से
द्वार को मेरे.....
अपने होके तुम ही सदा पास मेरे हो प्रभु
जीवन के सब आनंद जैसे तुझमें है समाया
अंतर मेरे भर गए हैं
तूने इतना दिया हमें
कहने देना तेरी कथा
हर इक पल में मुझे
द्वार को मेरे.....
जैसे रात छुप के रहे जब आए उजाले
वैसे मैं भी चाहूँ प्रभु तुमको इस जीवन में
मिट जाए ये नाम भी मेरे
रहे नाम होंठों पे तेरे
सब के साथ मिल जाऊँगा
पहचान में तेरे
द्वार को मेरे....
6
सत्य जो है छिपा
सत्य जो है छिपा दुविधा में
उसको गुरु बिना कौन बताए
जीवन में जो सदा रह गए पर्दे में
भावना के जोत में प्रकाश ना हो पाए
इस लिए खुद को सौंप दिया है
तेरे ही चरणों में स्वामी
मेरे जीवन में तुम्हारे अलावा
और कुछ ना होगा
सत्य जो है छिपा......
द्वार को मेरे खोल दो प्रभु जाऊँगी राहों में
तेरी लीला में भाग लेने को दुनिया में लाए हो
अहं से दूर तूने मुझको
रख लिया है जैसे सबसे छुपाके
ढूँढ के जो तुझे पाया
वही तो ये जाने
सत्य जो है छिपा....
नई दिशा कोई है सामने आँखों के
भर गया है दिल जैसे खुशी से
इसलिए खुद को रखा मैंने
सब से बहुत दूर
क्या होगा वह सम्मान का
माला पहन के भी
सत्य जो है छिपा....
7
भोला मन तेरा है
भोला मन तेरा है कहाँ घर बार
ढूँढने से भी मिलता नहीं रहता कहाँ तू
बोल यार रहता कहाँ तू
रस में अगर मज गए तो मन मेरा डूबे रहे
बस में नहीं उसको छूना
नहीं है उपाय अरे क्या करूँ मैं उपाय
अपने साथ गुज़ारा नहीं हुआ
मेरे पास आने से भी मैं नहीं मन का
मन मेरे कहाँ तू रहता है
बोल ना कहाँ तू रहता है
भोला मन तेरा है...
भिन्न जात के भिन्न आधार मन को मेरे नहीं है विचार
रसिक जन से हो मुलाकात लौटता नहीं और
एक हो जाए समाकर
आँधी आई जैसे कोई नैनों में दो मेरे
मन मेरे पास आकर रह गया साथ मेरे
मन मेरे साथ रहता है
भोला मन तेरा घर मेरे अंदर
अब से रहना तू मेरे पास रहना मेरे पास
मन मेरे साथ ही रहना
मन मेरे साथ ही रहना
8
नहीं छोड़ा तुमने मुझे
नहीं छोड़ा तुमने मुझे
सुबह आई मुझमें ही
स्वरूप अपरूप में आके क्या दिखाया
समझाया इसलिए समझा है तुम्हें
चेतना यह गम और दर्द भावना से
मैंने अंतर में आज सुनी है
समझी है तेरी वाणी समझाई तूने
ये शरीर मन प्राण घुल मिल गए हैं
लीला अपरम्पार दिखाई तूने
नहीं छोड़ा तुमने मुझे...
तेरी ही महिमा आज लोक से लोक में
मेरे ही तन में है कण कण में
आई है खबर मैंने पल में है पाई
जान लिया तुम्हें प्रभु पहचाना मैंने
जहाँ चले जहाँ रहे जहाँ घर मेरा
हर एक साँस का है बस नाम तेरा
नहीं छोड़ा तुमने मुझे....
9
मेरा मन भागना
मेरा मन भागना ही बस चाहे
अरे मन मैं नहीं गया पास तेरे
करीब जो तू आए
मैं ही दूर में रहा
समझा के भी अंतराल में रखा
अरे मन मैं नहीं गया पास तेरे....
साधन हुआ भजन हुआ
मन मेरा दूर ही रहा
एक ही ब्रह्म निराकार में
रह गए जगत में
है पता सब कुछ का फिर भी
मेरा मन भागना ही बस चाहे
अरे मन मैं नहीं गया पास तेरे...
बेला गई आज तुम दिखाए
निराकार में मगन होने से
ब्रह्म होके एक ही गुरु इन हृदय में है
चितवन में शुध हो गए
वो मन मेरे आपन हुआ रे
अरे मन तुझे आज पाया पास मेरे
प्राण में दृष्टि लाई
रखा पास अपने
समझा के तुम पास ही रहे
मेरे ही अपने होके
अरे मन तुझे आज पाया पास मेरे
10
इस आकुल संसार में
इस आकुल संसार में दर्द सदमे आए प्राण में
वीणा की झंकार से
अंतराल से हँसते हो तुम व्याकुल करके हमें
आज तुमने पहचान करवाई नकाब खोल दी सबकी
वे भी यही जान लिए है शक्तिविहीन हूँ मैं
इसलिए सब छोड़के शरम
सत्य को आज त्याग दिए है
खुद को गर्व से आज खड़े हैं सब कुछ ठुकरा के
इस आकुल संसार में...
निंदा दुख से अपमान से भी
कितने सदमे आए हैं प्राण में
फिर भी जाना कुछ भी यहाँ
खोने को नहीं है
मान अपमान और ना रहे
शरम हया चले गए हैं
निंदा हुई भूषण मेरे
ले लिया माथे पे मैंने
इस आकुल संसार में...
सोचता हूँ अंत तो यहाँ होगा
फिर से आदेश प्राण में आए
लगा तो लेते हो करम से तेरे
हमेशा रहे ये तेरे
ठान ली मैंने सामने खुद के
रहेंगे ना और कंगाल होके
निकलूँगा बाहर काम से हर एक
तेरे करम समझ के
इस आकुल संसार में....
11
सौंप दिया मैं दिल
सौंप दिया मैं दिल उसको
वो ही मेरा अपना है
घर तो मैंने बाँध लिया था
आके फिर वो गए गुम
नहीं जान पाया ये दिल नहीं जान पाया ये दिल
इच्छा थी कि मिलूँ उसे
रहेंगे वो घर में मेरे
करके जतन मैंने सजाई
दिन दयाल की कुटिया को
पास का इन्सां दूर का इन्सां
सजन जाने कौन है इन्सां
सजन तुम हो प्राण का इन्सां अपने हो मेरे
नहीं जान पाया ये दिल नहीं जान पाया ये दिल
तेरे प्रेम पास में आए
उठा तूफाँ मन के द्वारे
मिलन हुए साथ तुम्हारे
मन के मेरे देवालय से
अंतराल ना कोई प्राण में
निकल आया जग ये जाने
मन में जैसे पाए हैं तुम्हें गहरी खामोशी से
जान गया अब दिल मेरा जान गया अब दिल
सौंप दिया मैं दिल……
12
गुरुकरण करके भी तुम
गुरुकरण करके भी तुम गुरु के रूप नहीं जाना
गुरु तो है अरूप स्वरूप निरूप होके विश्वरूप
गूलर वृक्ष में फल जो है
रहता है फल उसके अंदर
बाहर से ना पकड़ा जाए
प्रकाश है उसके अंदर
गुरुकरण करके भी तुम ...
गर्भ हो तो सम्झा ना जाए
धात्री हो तो समझे भाषा
अगर कोई अंदर देखे
देते है दर्शन
गुरुकरण करके भी तुम ....
दिन की ज्योति अँधेर लाए
अँधेर से उजाले आए
समझे अगर इसको कोई
भिन्न फिर क्या है
गुरुकरण करके भी तुम ....
गुरु तो है विश्वरूप
सर्वदेव के श्रेष्ठ रूप
समझे अगर बात को कोई
विभेद कोई ना रहे
गुरुकरण करके भी तुम ....
13
है तेरा वो रूप
है तेरा वो रूप जैसे छाँव धूप
ध्यान करूँ किस रूप का तेरा
सारा ये संसार है तेरा ही दान
तेरी ही कृपा से है जीवन मेरा
है तेरा वो रूप ...
सृष्टि का सृजन तूने किया है
चारों ओर तेरी ही महिमा
तेरे श्री चरणों में है तीनों लोक
तेरी कृपा से सब दरस किया
है तेरा वो रूप ...
रूप के सागर में जीव हो विलीन
तेरा रूप माया देखूँ प्रदिन
सब निराकार तेरी ज्योति में साकार
तेरी रूप प्रतिमा है निसदिन
है तेरा वो रूप ...
माता पिता के रूप में तुम आए
हृदय में है ध्यान तेरा
गुरुवर तुम हो जग देवता
हर देह में है प्राण तेरा
है तेरा वो रूप ...
तूने ही बनाया है रूप ये मेरा
निज रूप में मुझको मिलाना
हे गुरुवर स्वामी विद्यानंद
तेरी ही कृपा से है जीवन हमारा
है तेरा वो रूप ...