Lyrics of Hillol
हिल्लोल


1
 जय गुरु जय

जय गुरु जय, जय गुरु जय
नमन मेरे गुरु चरण तुम्हारे
जय गुरु जय, जय गुरु जय

तुम्हारा आशीष सदा साथ रहे
रखना तू मुझे गुरु साथ तेरे
जय गुरु जय, जय गुरु जय

भूलने ना देना गुरु तुमको कभी भी
पाऊँ सदा सुख गुरु नाम में तेरे
जय गुरु जय, जय गुरु जय

गुरु तुम्हीं नारायण तुम्हीं श्री हरि
नमन मेरे प्रभु चरण तुम्हारे
जय गुरु जय, जय गुरु जय

 
2
जय गुरु माधव

जय गुरु माधव कृष्ण मुरारी
तुम ही गोपी वल्लभ तुम ही गिरधारी
तुम ही गुरु नारायण तुम ही श्री हरि
प्रणाम करूँ प्रभु चरणों में तेरे

रखा है सदा ही प्रभु करीब तेरे
प्रयोजन में आते हो सबके करीब
करते हो तुम इच्छापूरण
है जो मनस्काम
हर एक प्राण में प्रभु
तेरे ही वो दान
जय गुरु माधव ..

आनंद आए प्राण में तेरे दरशन में
भुवन में है ज्योति तेरे ही रूप में
नाम में तेरे पाए सब शांति जीवन में
प्रिय रूप में प्रिय तुम हो सर्व जन में
जय गुरु माधव ....

देखते हो नैनों से विश्व जन को
दिवस निशि तुम हो साथ सब ही के
सुन ली तेरी ही वाणी प्रभु दिगंत में
प्रेम के आलोक प्रभु पाए हैं प्राण में
जय गुरु माधव ....


3
गुरुदेव तुमसे हो

गुरुदेव तुमसे हो मेरी मुलाकात
रहना तुम साथ मेरे
आशीषों के साए में तुम रखना

नाम को सदा साथ रखना
ना हो मन की अन्य दिशा
नाम के प्रेम से होश उड़ा दो
दो वो परम धन
भावना सभी दूर हटा के
मन को ला दो उस चरण में
सार कथा को तुम बता के
रखना अपने साथ गुरु
रखना अपने साथ
गुरुदेव तुमसे हो .....

जब मैं तुम्हें जान लूँगा
ना रहेगा कोई पछतावा
तुझमें ही मैं ढूँढ लूँगा
हर एक राह को
ना रहेगी कोई कथा
भाव तो मेरे ऐसा होगा
रहेंगे बस तुमको लेके
रहेंगे साथ अपने गुरु
रहेंगे साथ अपने
गुरुदेव तुमसे हो ....


4
प्रभु तुम्हें क्यों

प्रभु तुम्हें क्यों नहीं पाई
जानूँ मैं तुम हो
फिर मैं क्यूँ सोचूँ बुलाऊँ तुम्हें
बोलो प्रभु बोलो प्रभु बोलो ना मुझे
बोलो प्रभु बोलो प्रभु बोलो ना मुझे

बड़ी आशा जागे मन में
जो तुमने कहा है प्राण में
उसी तरह रहूँगी मैं साथ तेरे
कहूँगा ना कोई कथा
रहेंगे हम खुद में मगन
हृदय में देखेंगे हम तुमको सदा
बोलो प्रभु बोलो प्रभु बोलो ना मुझे

कितनी कथा आए मन में
सूनी है जो मन प्राण में
उसी तरह रहूँगी मैं साथ तेरे
ब्रह्म के हो स्थिति कथा
जैसे सूनी है मैंने
वही रूप मैं चाहूँ तुमको सदा
बोलो प्रभु बोलो प्रभु बोलो ना मुझे


5
सह ना पाऊँगा

सह ना पाऊँगा और मैं गुरु
सह ना पाऊँगा और
कितनी कथा प्राण में आए
कितनी कथा मैं सोचूँ
कब मैं कहूँ तुम्हें गुरु
कब मैं कहूँ तुम्हें

समझे ना कोई ये गम मेरे प्रभु
सौ दर्द जैसे काँटे हो के चुभे
बस हमें सताए
क्यूँ ना पाया तुमको स्वामी
क्या होगा मेरा ये जीवन
सह ना पाऊँगा .....

कितनी कथा मैं सुन ली प्राण में मेरे
बोलो प्रभु तुम बोलो ना मुझे
क्यूँ नहीं पास बुलाए
तेरी जुदाई कैसे सहूँगा
क्या होगा मेरा ये जीवन
सह ना पाऊँगा ....


6
गुरु सदमा क्यों

गुरु सदमा क्यों प्राण में आए
क्या वो तेरे ही दान
क्यूँ ना समझ पाए प्रभु तू है महान

कभी वो पाया है मैंने
दिया जो सुख तुमने लाके
पाया है स्पर्श तेरे
वो भी तुम प्राण में दिए
फिर आँखों में क्यूँ आँसू है आए बार बार
गर तुमही खुद हो प्रभु
मेरे इस हृदय में
सदमा क्यों प्राण में आए....

जो कुछ मैंने पाया
सभी तो वो तुमने दिए
ले लिए चरण में हमको
क्या मैं वो भूल पाऊँ
फिर सदमा क्यूँ कष्ट होके आए बार बार
गर तुमही खुद हो प्रभु
मेरे इस हृदय में
सदमा क्यों प्राण में आए....

तेरा प्रेम प्राण में लेके
मगन हूँ काम में हरेक
ज्योति में दे दी पनाह
तू ही मेरे अपने होके
फिर रंज गम ये क्यूँ हमेशा मन को रुला के जाए
गर तुमही खुद हो प्रभु
मेरे इस हृदय में
सदमा क्यों प्राण में आए....



7
दर्द है ये

दर्द है ये मन में बहुत
ऐसा सदमा प्रभु मन में क्यूँ आए
दर्द है मन में बहुत

ऐसा करम कोई नहीं किया मैं
कड़ी बात सुनूँगी जो नहीं सोची थी
आँखों में है आँसू दुख में मेरे
कैसे सहूँगी प्रभु बोल दो मुझे
दर्द है मन में बहुत...

बहुत सदमे प्रभु पाया है मैंने
मैंने तो नहीं चाही दुख की लहर
आज क्यूँ दर्द ये मेरे ही लिए
ऐसी शक्ति दो के सह पाऊँ मैं
दर्द है मन में बहुत....

दीनदयाल तो तुम्हीं पतितपावन
फिर क्यों आए दुखों का मन में सैलाब
सब कुछ सह के मैं आँखों के आँसू में
पाया है तुम्हें प्रभु अपने अंदर
दर्द है मन में बहुत...




8
अपने ही साथ ना

अपने ही साथ ना करो और छल
गर समझा के ना समझो सब
रहेंगे ना बल
क्या पाओगे फल

और ना करो देरी
आएगा वक्त का बुलावा
आएगी तो बारी
समय है सोचो तुमभी ज़रा
नाम पाके भी क्या हो साथ नाम के
क्यूँ नहीं है चिंता तुम्हें खुद को धोका देते हो
बहु के बीच ना पाओगे अपने इष्टगुरु को
अपने ही साथ ...

और ना करो देरी
आएगा वक्त का बुलावा
आएगी तो बारी
ना रहो और अहम में तुम
स्मरण करो गुरु वाक्य को
समर्पण में तुम पाओगे तुम गुरु कृपा प्राण में
बहु के बीच ना पाओगे अपने इष्टगुरु को
अपने ही साथ ...


9
मैं तो वहाँ

मैं तो वहाँ गया भी था परम भक्ति लेके
तुमको ही देखने को
तुम तो वहाँ रह के भी
नहीं लिया पास हमको

उस दिन कोई पास ना आए मुझको बुलाने को
थक के तो मैं चला आय बाहर राह पकड़ के

दुख में मेरे नैनों में दो आँसू छलक आए
बोलो प्रभु बोलो मुझे पास में क्यों ना बुलाए
मैं तो वहाँ गया भी था परम भक्ति लेके

जो भी खोए प्यार में तेरे अपनी कल्पना में
वही तुम्हें बाँध के रखे डोर से कठिन अपने
लोग करे निंदा सच भी हो सकता है वो
सभी निंदा सर पे लिए रहूँगा मैं नीचे
मैं तो वहाँ गया भी था परम भक्ति लेके

देखूँगा मैं पास वहाँ से तेरी ही ओर प्रभु
अंतराल में मैं रहूँगा दूर सभी दृष्टि से
ना रहेंगे और बातों में अपने साथ रहेंगे
रहेंगे हम तुमको लेके रहेंगे सुख से सदा
मैं तो वहाँ गया भी था परम भक्ति लेके


10
भाई रे और ना रहना 

भाई रे और ना रहना अन्य मन में
परम प्रिय नाम तू पाए
रहले सदा नाम के ही साथ

दिन आए और चले जाए फिर
हो तुम अपने साथ
क्या पाए तुम इस जीवन में
देखो सोच के ये
भाई रे सोच के तुम
सुख में भी तो दुख पाए तुम
नहीं है शांति जीवन में
असल से तुम दूर जाके बस
पकड़े नकल को
सब कुछ तुम छोड़ के अब
रह लो गुरु नाम में
भाई रे और ना रहना .....


ज़माने पे मत जाओ तुम मानो गुरु को
रात दिन नाम के ही साथ रहो युक्त होके
भाई रे रहो युक्त होके
भूल के बाद भूल किए तुम
उसको नहीं सुधारा भी
अब भी वक्त है लौट के आओ
शरण में आओ नाम के
भाई रे शरण में आओ नाम के
नाम के साथ सोचो ना बस
नामदाता और नामी को
भाई रे ....

ना और करो नज़र अंदाज़ माँग लो उसकी दया
चाहिए जग पार होने को गुरुनाम की कृपा
भाई रे गुरुनाम की कृपा
आ रही है आखरी घड़ी नाम में ही है भरोसा
भव सागर को पार करेगी गुरुनाम की नाव
भाई रे गुरुनाव की नाव
गुरुचरण शरण करो रहो नाम गुरु के
भाई रे.....


11
खुद को खुद ही

खुद को खुद ही साथ रख लो
डूब देके देखो मन सागर में
देखोगे सब दृश्य को
गुरु तेरे इष्टरूप में है तो हृदय में

एक माला में बहुत फूल तो है
रूप और गुण में विचित्रता भी है
देखो उसे प्रेम भाव से भेद ना करो मन में
तुम्हारी वो माला देखो गुरु के गले में
अपने र्रोप को बीच सभी के उन्होंने दिखाए
खुद को खुद ....

कितने किस्म का है अँधेरा
जिसमें ज्योति उसका ही प्रकाश
देखो उसे नैनों में तुम भक्ति के सहारे
सब ज्योति को देखोगे तुम एक ही ज्योति में
गुरु ही है प्रकाश उसके जैसे ज्योति होके
खुद को खुद ...


12
मन का बंधन

मन का बंधन टूट गया है नहीं है बंधन और
गुरुचरण के सहारे होंगे भवसागर ये पार

कितने समय बीत गए हैं
क्या होगा और ज्ञान विचार से
इतने सारे अंहकार में
फ़ायदा भी है क्या

मन के सारे द्वन्द्व से ये बढ़ गए भेद भाव
वो तो मेरे अपने हुए मैं ना हो सका

रात में हुई रोशनी लौ से दूर गए अँधेरा
प्यार आ गए प्राण में सत्यस्वरूप होके
विश्व मेरे निकट हुए मेरा मैं हुआ दूर
कारण बिना कार्य बेकार कथा बिना है सुर