Lyrics of Gurudev Teri Leela Kya Samjhoon
गुरुदेव तेरी लीला क्या समझूँ
1
गुरु
बिना कुछ नहीं
गुरु
बिना कुछ नहीं, सदा भजो गुरु
गुरु
सर्व फल दाता, गुरु कल्पतरू
गुरु
मूर्ति ध्यान करो, पग इनके पूजो
गुरुवचन
श्रेष्ठ मंत्र, सदा गुरु भजो
मोक्ष
दायी गुरु कृपा, चाहो सब यही
गुरु
और गोविंद बीच भेद कोई नहीं
गुरु
से बड़ा जगत में, कुछ भी है नहीं
गुरु
ज्ञान लाभ करूँ, गुरु चरण गही
2
गुरु
के रूप में जो
गुरु
के रूप में जो, ईष्ट मिला है तुम्हें
कहो
और चाहिए क्या, और कहीं से
तो
फिर गाओ गुरुनाम, भजो गुरुनाम
गुरुनाम
ध्यान में है, सुख भरा धाम
सरल
कर के ये मन, भजो नाम हो के मगन
रूप
में गुरु के देखो, सारे भगवन
कभी
ना उन्हें भुलाना, जिन्होंने गले लगाया
उनका
वो नाम पावन, बिस्राना ना
तो
फिर गाओ गुरुनाम......
देखो
अपने नैनन से, देखो सारे भुवन में
बीच
सबके बसा है, तेज गुरु का
भरम
नहीं है मन में, शक हो ना जीवन में
खुद
को लगाना तू, गुरु चरण में
तो
फिर गाओ गुरुनाम....
नाम
का लेके सहारा, तज दो जो भी है पास
दिल
में मत रखना, भ्रम का कोई आभास
मन
में खुशी लेके, नैनों में बसाओ उन्हें
दिल
के आईने में, देखो उनका प्रकाश
तो
फिर गाओ गुरुनाम....
3
मन
से मानी मैंने
मन
से मानी मैंने सच्ची ये बात
सुख
मिलेगा कैसे दे के आघात
जैसा
तुम बोओगे वो ही पाओगे
दुखी
जन के आँसू में मिले परिणाम
एक
गल्ती के पीछे, सौ भूल आए
ऐसा
कह के किसी को, क्यों तू सताए
अपने
ही ज्ञान पे ना हो अभिमान
दूसरों
की सोच को देना सम्मान
होता
है जो भी कुछ, करें गुरुवर
नीचा
ना दिखा किसी को, गर्व ना कर
दुख
देना ना किसी को, प्रेम ही फैलाओ
कर्म
से अपनी सच्ची जोत ही जलाओ
4
जब
से किया मैंने
जब
से किया मैंने, है तेरा नज़ारा
मन
को मिला हर पल सुख का सहारा
बार
बार आके तुमने, मेरे नयनों में
अपनाया
है मुझको, दुख से उबारा
खुशी
और गम की झलक दिखा के
मुझे
बाँध रखा है पास बुला के
जाने
कितने मन में सुर बजते हैं
आज
याद करता हूँ, यूँ ही बैठे बैठे
जब
से किया मैंने....
हो
के रूपवान तुम आए पास मेरे
दूर
नहीं किया सदा पास रहा तेरे
कानों
में यही कहा साँझ सवेरे
जीवन
में मृत्यु में साथ है तू मेरे
जब
से किया मैंने....
जीवन
या मरन में, साथ में तू मेरे
जब
पास आते हो मधु मुस्कान लिए
कितनी
हैं बातें की, संग मुझे लिए
अपनी
महिमा से सारे पाप हरे
अपने
गुणों से, सदा मुझको संवारे
जब
से किया मैंने....
जैसी
चाही सूरत, वैसी पाई तेरी
करो
स्वीकार प्रभु, अंजली मेरी
प्यार
से पास अपने, मुझको बुलाया
पास
मुझे रखना और देना प्रेम छाया
जब
से किया मैंने....
5
जो
भी मैंने चाहा
जो
भी मैंने चाहा तुमसे
मुझको
सब दिया है खुद से
जीवन
सफल हुआ तेरे
चरण
कमल से
बात
याद आती है वो
जब
था तुमको मैंने पाया
मन
पे नहीं ज़ोर रहा
ऐसी
है तेरी माया
जब
तलक चलेगी साँस
खत्म
नहीं होगी चाह
संग
तेरे ही चलूँगा
तेरे
रस्ते से ।
हो
गई कम बातें मेरी
सुनता
हूँ मैं बातें तेरी
देती
है सुख मन को मेरे
हृदय
जोत तेरी
दुख
का हर तूफ़ान सहूँ
साथ
लेकिन तेरे रहूँ
तेरी
पूजा करता रहूँ
पूरी
लगन से
जब
से किया मैंने....
6
गुरु
कर उजाला
गुरु
कर उजाला जग में सारे
तुम
ने किया त्राण
जान
ना पाए, देख ना पाए
मेरा
मन प्राण
करना
स्मरण उनके चरण
लेते
रहो नाम
मन
ही मन में करो
गुरु
का ही ध्यान
जय
गुरु जय गुरु जय गुरुनाम ....
करो
वरण लेके शरण
करो
व्याकुल प्राण
मन
में भक्ति भाव जगा के
लेना
गुरु नाम
जय
गुरु जय गुरु जय गुरुनाम ....
7
प्रभु
मेरे पास आए
प्रभु
मेरे पास आए, आए पास मेरे
आँख
दोनों भर जाती हैं, दरसन से तेरे
दिन
हो या रात प्रभु तेरी ही राह देखूँ
पग
पड़े जिसपे तेरे पथ वो निहारूँ
मन
की व्यथा सुनाऊँ, प्रभु तुम ही समझना
दिल
की पीड़ाएँ हरना, भक्तों की तेरे ।
प्रभु
मेरे पास आए....
मुझसे
जो तूने कहा इस दिल में आके
साथ
अपने रखूँगा अपना बनाके
मन
कामना सुनाऊँ प्रभु तुम पूरी करना
पूरी
करके लाज रखना, वचनों की तेरे ।
प्रभु
मेरे पास आए.....
8
मन
मेरे हैरान ना हो
मन
मेरे हैरान ना हो
लौट
के घर तू चला चल
ना
बुलाएगा तुझे कोई
खुद
आएगा हर पल
साधना
के बिना नहीं है, राह कोई और
छोड़़
ये पथ क्यों जाते हो, राह कोई और
नाम
भजन बिन जीवन में, और क्या है काम
नाम
भजे जाओ, नाम भजन गाओ
एक
सच्चा नाम ।
मन
मेरे हैरान .....
समय
चक्र घूमा जाए, डरना तू नहीं
नाम
को भी जीतेगा तू, नाम जप यही
नाम
मिल गया, सब मिला, नहीं दूजा काम
याद
सदा इसको रखना, यही चारों धाम
मेन
मेरे हैरान .....
9
मन
कौन है तू
मन
कौन है तू बोल
तू
ही था, तू ही रहेगा
सोच
के ये देख ज़रा
नाम
से तू नाम मिला
खुद
से मिल ज़रा
क्या
है नाता मेरा खुद से
देख
नयन खोल
जब
तुझे पता चलेगा
तुझमें
ही है वो रहता
जान
कर ही पाएगा तू
पथ
वो मुक्ति का
गुरु
नाम बिना नहीं
पथ
है मुक्ति का
हर
कहीं तू ही बसा है
तूनी
ये जब समझा है
तुझको
भी अहसास होगा
उनकी
शक्ति का
गुरु
नाम बिना नहीं
पथ
है मुक्ति का
10
तेर
स्वर आए हैं
तेर
स्वर आए हैं मेरे मन में
तूने
जो कहा था मुझे आज भी भूला नहीं
तुम
ही विचार करो सुनो तो सही
बिन
तेरे चरण सुख है कहाँ
समझा
ये बात प्रभु नाम जो लिया
नाम
के ही सहारे मुझे चलना
चरण
पग तले
मुझे
रहना...प्रभु....मुझे रहना ।
जीवन
है क्या दुख का दरिया
पूजा
ने तेरी है सुख भर दिया
सुख
दायी है प्रभु नाम तेरा लेना
नाम
भजन के संग
मुझे
रहना...प्रभु....मुझे रहना ।
11
आज
का दिन सुहाना
आज
का दिन सुहाना
मन
में बजा साज नया गूँजे नया तराना
जीवन
सफल करे मेरा आशीष ये तुम्हारा
जग
में एक नाम रहे, तुझसे ही बस काम रहे
पूजा
की घड़ी, पूजा की बेला, चरण तेरे ही गहे
युग
युग है नाम तेरा, सुख से भरा जीवन मेरा
जहाँ
रहे नाम तुम्हारा, वहाँ हो उजियारा
जीवन
सफल करे मेरा.....
दिन
के बाद रात होती, जलती है फिर से ज्योति
जल
में थल में तेरी आभा, बन के चमके मोती
गूँजते
हैं तेरे ही स्वर, सुनता हूँ मैं सब भुला कर
मिल
जाए तेरी हँसी में, कष्टों से छुटाकारा
जीवन
सफल करे मेरा.....
देखा
मैंने जग में सारे, तुम हो सबके सहारे
मेरे
मन से दूर ना जाना, ओ मेरे रखवारे
मैंने
अपना सारा जीवन, सौंपा तुम्हें तन-मन-धन
दिल
से मुझे दूर ना करना, फिरूँगा मारा-मारा
जीवन
सफल करे मेरा.....
12
मैं
उसकी खोज में चला
मैं
उसकी खोज में चला
जो
संग ही मेरे रहा
सो
गया मैं भीड़ में ही
मंदिरों
में जाके, मैं तो देख ही ना सका
मन
की आस मन से मेरे खोती जाए
प्यास
मेरे मन की मुझे, मंदिर में ले के जाए
जन
के कोलाहल में, आँख मेरी भटक जाए
जहाँ
था मैं लौटा वहीं, प्यास वो अधूरी लिए
मैं
तो देख ही ना सका....
आरती
भी देखा मैंने, मन भी मेरे संग ही था
आरती
की थाल में जला, दीपक भी मेरा ही मन था
सारा
विश्व दौड़ा आया, एक ज्योति की लगन में
मैं
भी वहीं खड़ा रहा, जान नहीं सका
मैं
तो देख ही ना सका....
करना
जो था दरसन किया, और लोग जाने लगे
आँगन
में उस मंदिर के, पग मेरे दो जमे रहे
अपनी
ओर ज्योंही देखा, कौंधी एक ज्योति रेखा
मन
में ही है छिपा जिसे देख नहीं सका
मैंने
पास ही में देखा
जो
था मन में मेरे बसा
मन
में ही है छिपा जिसे देख नहीं सका
मैंने
पास ही में देखा
जो
था मन में मेरे बसा ।
13
गुरुदेव,
तेरी लीला क्या समझूँ
गुरुदेव,
तेरी लीला क्या समझूँ
अंतहीन
शक्ति तेरी, ना समझूँ ना जानूँ
भव
सागर में तेरे सहारे, पार कर लूँ
सुख
भी है तुमसे प्रभु, दुख भी है तुमसे
जान
के भी माना नहीं, मूर्ख कौन हमसे
दिन
ये कैसे बीता जाए, करूँ मैं विचार
पाके
भी तुम्हें गँवाया, जीवन बेकार
गुरुदेव,
मेरा ये जीवन बेकार.....
आके
प्राण में बसते हो, जब करीब होते
सच्चा
जग, मैं रह गया, क्यों अजीब होके
पास
आकर भी मेरा, मनवा भागा जाए
सब
कुछ खोया, मानव जनम गँवाए
गुरुदेव,
मानव जनम क्यूँ गँवाए ....